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About Me

It’s difficult to say what I am! Love to read and write poetry but fiction is equally close to my heart. History is something I can’t do without and Marxist philosophy attracts me more than any thing else.

 

Born in a middle class family did schooling from a rightist institution but under the liberal eyes of professor father and religious mother developed sort of rebellious for some and jack of all for others. Followed my passion all the life and in the meantime published books of various genres.

Books By Ashok Kumar Pandey

KASHMIRNAMA

‘‘कश्मीर के अतीत और वर्तमान की समझ को लेकर हमारे चारों ओर जो खौफनाक चुप्पी पसरी है उसे तोड़ने की कोशिश करती इस पथप्रदर्शक किताब के महत्व को कम करके नहीं आँका जा सकता। चूँकि कश्मीर हर हिंदुस्तानी की जबान पर मौजूद रहता है, थोड़ी असहजता के साथ ही सही, ऐसी दर्जनों किताबें पहले ही हिन्दी पाठकों के सम्मुख होनी चाहिए थीं। अब इस तरह के कदमों से कश्मीर को अखबारों और टेलीविजन की सुर्खियों के शिकंजे से बचाया जा सकता है, और ये एक शुरुआती संवाद का रूप भी ले सकते हैं जिससे लोग यह विचार कर सकें कि कश्मीर से भारत को आखिर क्या मिला है। और भारत ने कश्मीर में क्या किया है।’’
‘‘अशोक कुमार पाण्डेय की ‘कश्मीरनामा’ हिन्दी में कश्मीर के इतिहास पर एक पथप्रदर्शक किताब है। यह किताब घाटी के उस राजनैतिक इतिहास की उनकी स्पष्ट समझ प्रदर्शित करती है जिसने इसे वैसा बनाया, जैसी यह आज है।’’
‘‘ ‘कश्मीरनामा’ पढ़कर इस बात का सुखद अनुभव होता है कि इसे एक-एक ऐतिहासिक घटना को बड़े एहतियात के साथ, छेड़े बिना, किसी भी प्रकार के पूर्वग्रह से मुक्त होकर लिखा गया है। मुझे उम्मीद है ‘कश्मीरनामा’ को कश्मीर में रुचि रखने वाले पाठक, शोधकर्ता और शिक्षक कश्मीर के इतिहास की पुस्तकों में एक दिग्दर्शन-पुस्तक के रूप में लेंगे।’’
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हैलो @SwetaSinghAT जी, इस ट्वीट को देखें व ये किताबें पढ़ें। आपके लिए एकदम ज़रूरी। https://twitter.com/Ashok_Kashmir/status/1558724706521731072

15 अगस्त 1947 के रोज प्रकाशित "आज" का यह स्वाधीनता विशेषांक अखबार ने तब भावनाओं का एक चित्र उकेरा था कि अशोक की स्मृतियों से युक्त सिंह-आसन पर आरूढ़ मां भारती का राज्याभिषेक हो रहा है।पं.जवाहरलाल नेहरू उन्हें राज-मुकुट पहना रहे हैं।
#आज़ादी_की_गौरव_यात्रा